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प्रेम मंदिर की यात्रा – एक 12 साल के बच्चे की नजर से

Writer: Kripalu Ji Maharaj Devotee
Kripalu Ji Maharaj Devotee
Jun 17, 2025
1 min read

ठंडी की छुट्टियाँ शुरू होते ही मैं बहुत खुश था। अब पूरे दो हफ़्तों के लिए ना स्कूल जाना था, ना होमवर्क करना था। मुझे लगा पापा हमको इस बार पहाड़ों पर बर्फबारी दिखाने लेकर जाएंगे, लेकिन जब पापा ने बताया कि हम वृंदावन के प्रेम मंदिर जा रहे हैं, तो मेरी एक्साइटमेंट थोड़ी कम हो गई। मुझे लगा मंदिर में तो बस पूजा-पाठ होता है, मैं वहां जाकर क्या करूंगा! मैंने जब इसके बारे में मम्मी से बोला तो उन्होनें यह कहकर टाल दिया, "एक बार चलो तो, फिर देखना!"

हम सुबह तैयार होकर दिल्ली से अपनी कार से ही वृन्दावन के लिए निकले। पापा कार चला रहे थे, मम्मी और मेरी बहन पीछे वाली सीट पर थी, और मैं आगे पापा के बगल में बैठ गया। रास्ते में मैं खिड़की से बाहर देखता रहा और सोचता रहा कि पता नहीं ये ट्रिप कैसी होने वाली है। पापा रास्ते में बता रहे थे कि प्रेम मंदिर जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ने बनवाया है और यह राधा-कृष्ण जी और सीता-राम जी का मंदिर है। लेकिन मैं बस सिर हिला रहा था और मन ही मन सोच रहा था कि काश हम कहीं स्नोफॉल वाली जगह पर जाते। आगे पढ़े

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