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धनतेरस 2025 और जगद्गुरु कृपालु जी महाराज की सफलता की सीख

  • Writer: Kripalu Ji Maharaj Devotee
    Kripalu Ji Maharaj Devotee
  • Jan 29
  • 2 min read

धनतेरस 2025 की तिथि 18 अक्टूबर को है, जो शनिवार को पडेगी। यह पर्व हिंदू कैलेंडर के कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है, जिसमें लोग सोना, चांदी या बर्तन खरीदकर धन की देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं और घर में समृद्धि का स्वागत करते हैं।

धनतेरस 2025 का पर्व न केवल धन और समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि यह आध्यात्मिक समृद्धि की ओर भी संकेत करता है। यह दिन व्यापारियों और घरों में धन और खुशहाली के लिए विशेष महत्व रखता है, लेकिन सच्ची समृद्धि जगद्गुरु कृपालु जी महाराज की दृष्टि में केवल भौतिक संपत्ति तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, सच्चा धन वह है जो मन, हृदय और आत्मा में शांति, प्रेम और संतोष लाए।


धनतेरस का महत्व


धनतेरस पर साधक न केवल आर्थिक समृद्धि के लिए पूजा करते हैं, बल्कि अपने भीतर आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी प्रयास करते हैं। यह अवसर हमें यह याद दिलाता है कि जीवन में वास्तविक धन केवल बाहरी संपत्ति नहीं, बल्कि आत्मिक संतोष और भक्ति में छिपा है।

धनतेरस का महत्व आयुर्वेद से जुड़ा है, जहां इस दिन धन्वंतरी भगवान का जन्म हुआ माना जाता है, और लोग स्वास्थ्य एवं धन की कामना के साथ यमराज की पूजा करते हैं। इस पर्व पर बाजारों में खरीदारी का उत्साह रहता है, और घरों में दीपदान किया जाता है।

धनतेरस पर साधक न केवल आर्थिक समृद्धि के लिए पूजा करते हैं, बल्कि अपने भीतर आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी प्रयास करते हैं। यह अवसर हमें यह याद दिलाता है कि जीवन में वास्तविक धन केवल बाहरी संपत्ति नहीं, बल्कि आत्मिक संतोष और भक्ति में छिपा है। कृपालु महाराज का आश्रम उनके अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन का केंद्र है। यहाँ साधक भक्ति गीत, ध्यान और प्रवचन के माध्यम से अपने हृदय को शुद्ध करते हैं। आश्रम का वातावरण साधकों को आंतरिक शांति और ऊर्जा प्रदान करता है। भक्त बताते हैं कि आश्रम में बिताया समय उन्हें दिव्यता का अनुभव कराता है और जीवन में सच्ची समृद्धि की दिशा दिखाता है।


उत्सव और सामाजिक एकता


धनतेरस के अवसर पर आध्यात्मिक सभाएं और सत्संग का आयोजन होता है। 2025 में भक्तजन मंदिरों में इकट्ठा होकर इस त्योहार को जोश से मनाएंगे, जहां पूजा के साथ धार्मिक वार्ताएं होंगी। कृपालु महाराज के प्रवचन आज भी लाखों साधकों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनके प्रवचन सरल भाषा में गहरे आध्यात्मिक संदेश देते हैं और जीवन में सच्ची समृद्धि के मार्ग को स्पष्ट करते हैं। साधक उनके प्रवचनों से सीखता है कि केवल धन कमाना ही समृद्धि नहीं है, बल्कि प्रेम, सेवा और ईश्वर की भक्ति ही जीवन को पूर्ण बनाती है।

जगद्गुरु कृपालु महाराजने भक्ति और साधना को इस प्रकार प्रस्तुत किया कि यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए सुलभ और प्रभावशाली बन सके। धनतेरस 2025 जैसे अवसर पर उनकी शिक्षाएँ यह दिखाती हैं कि वास्तविक समृद्धि बाहरी संपत्ति से नहीं, बल्कि हृदय, मन और आत्मा की शांति और संतोष में निहित है। उनके भजन, प्रवचन और आश्रम के अनुभव आज भी साधकों के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन और प्रेरणा का अद्वितीय स्रोत बने हुए हैं।

धनतेरस पर भक्ति और आध्यात्मिकता को बढ़ावा देने के लिए सत्संग आयोजित किए जाते हैं। 2025 में इस पर्व को और अधिक उत्साह से मनाने के लिए भक्तजन मंदिरों में एकत्रित होंगे, जहां लक्ष्मी पूजन के साथ धार्मिक चर्चाएं होंगी।


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